यूरीड मीडिया- दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में नौकरशाह से राजनीति में आए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की करतूतों से पूरा देश शर्मसार है। जिस तरह से उन्होंने खुद दुनिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल के दोषी एपस्टीन से 4-5 मीटिंगों का जिक्र किया है, उससे लगता है कि पुरी को अपने इन शर्मनाक और घटिया कार्यों से कोई शर्म नहीं आ रही। पुरी का दावा है कि वे डिजिटल इंडिया को प्रमोट करने के लिए एपस्टीन से मिले थे। यह बयान उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
ऐसा नहीं है कि पुरी ने एपस्टीन से मीटिंग अनजाने में की हो। उन्हें पता था कि एपस्टीन नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करता और करवाता था। एपस्टीन 2008 में ही अपराधी घोषित हो चुका था। जिस थेथरई से उन्होंने कबूल किया और जिस तरह से ईमेल का आदान-प्रदान हुआ है, उससे स्पष्ट है कि मंत्री कहीं न कहीं एपस्टीन के घटिया कृत्यों में भागीदार बन रहे थे।
यही नहीं, 2013 में सेवा निवृत्त होने के बाद पुरी ने इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में सीनियर एडवाइजर का पद ग्रहण किया। दस्तावेजों से पता चला है कि एपस्टीन ने टेर्जे रोड-लार्सन (एक नॉर्वेजियन डिप्लोमैट और IPI के पूर्व प्रेसिडेंट) को किसी भारतीय नेता का ईमेल फॉरवर्ड किया था। इसके जवाब में लार्सन ने कहा था, "जब आप एक भारतीय और एक सांप से मिलें, तो पहले भारतीय को मार डालो।" ऐसे संगठन के मुखिया के नेतृत्व में पुरी ने कार्य किया, और इस संगठन को 2011-2019 के बीच एपस्टीन से $650,000 की फंडिंग मिली थी।
जिस तरह से ईमेल और मीटिंग्स का जिक्र है:
एपस्टीन ने पुरी को रीड हॉफमैन की भारत यात्रा के बारे में लिखा। पुरी ने जवाब में कहा "रीड हॉफमैन की यात्रा में मदद/सुविधा देने में खुशी होगी।" एपस्टीन ने अपनी असिस्टेंट के लिए भारत वीजा मांगा। पुरी ने पूर्व भारतीय कंसुल प्रमोद बाजाज को शामिल कर "प्राथमिकता" पर मदद की। पुरी ने एपस्टीन और हॉफमैन को लंबा ईमेल भेजा: भारत के इंटरनेट सेक्टर (200 मिलियन यूजर्स, 500 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद), मोदी की डिजिटल इंडिया पहल, लिंक्डइन vs नौकरी.कॉम की तुलना। एपस्टीन के सुझाव पर हॉफमैन को भारत जल्दी आने की सलाह दी। पुरी ने इसे "भारत के लिए निवेश का केस" बताया। पुरी ने एपस्टीन को लिखा: "एक्सोटिक आइलैंड से कब लौट रहे हो?" मीटिंग और भारत पर किताबें देने की इच्छा जताई। पुरी ने सफाई दी कि यह स्टाफ के वर्णन पर आधारित था, एपस्टीन के कुख्यात द्वीप से कोई संबंध नहीं। पुरी ने एपस्टीन से पूछा: "शहर में हो? कॉफी के लिए समय?" मीटिंग - एपस्टीन के आवास पर हुई। पुरी ने लिखा: "अगर शहर में हो, तो अपनी किताब 'पेरिलस इंटरवेंशंस' देने आना चाहता हूं।" एपस्टीन के आवास पर मीटिंग हुई। पुरी ने 11 AM आने की पुष्टि की। ईमेल में पुरी ने लिखा: "जेफ, अगर शहर में हो, तो चैट के लिए आना चाहता हूं।" एपस्टीन का जवाब: "कल फोन?"
इन ईमेल्स और मीटिंग्स का जिक्र करने के बाद भी मंत्री मंडल से इस्तीफा न देना मोदी सरकार के लिए कलंक है। जिस साफ-सुथरी छवि और ईमानदारी का मोदी दावा करते हैं, उसी के कैबिनेट में दुनिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल से दोस्ती रखने वाला हरदीप सिंह पुरी कैसे मंत्रीमंडल में अभी तक बना हुआ है यह और दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऐसा नहीं है कि पुरी ने एपस्टीन से मीटिंग अनजाने में की हो। उन्हें पता था कि एपस्टीन नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करता और करवाता था। एपस्टीन 2008 में ही अपराधी घोषित हो चुका था। जिस थेथरई से उन्होंने कबूल किया और जिस तरह से ईमेल का आदान-प्रदान हुआ है, उससे स्पष्ट है कि मंत्री कहीं न कहीं एपस्टीन के घटिया कृत्यों में भागीदार बन रहे थे।
यही नहीं, 2013 में सेवा निवृत्त होने के बाद पुरी ने इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में सीनियर एडवाइजर का पद ग्रहण किया। दस्तावेजों से पता चला है कि एपस्टीन ने टेर्जे रोड-लार्सन (एक नॉर्वेजियन डिप्लोमैट और IPI के पूर्व प्रेसिडेंट) को किसी भारतीय नेता का ईमेल फॉरवर्ड किया था। इसके जवाब में लार्सन ने कहा था, "जब आप एक भारतीय और एक सांप से मिलें, तो पहले भारतीय को मार डालो।" ऐसे संगठन के मुखिया के नेतृत्व में पुरी ने कार्य किया, और इस संगठन को 2011-2019 के बीच एपस्टीन से $650,000 की फंडिंग मिली थी।
जिस तरह से ईमेल और मीटिंग्स का जिक्र है:
एपस्टीन ने पुरी को रीड हॉफमैन की भारत यात्रा के बारे में लिखा। पुरी ने जवाब में कहा "रीड हॉफमैन की यात्रा में मदद/सुविधा देने में खुशी होगी।" एपस्टीन ने अपनी असिस्टेंट के लिए भारत वीजा मांगा। पुरी ने पूर्व भारतीय कंसुल प्रमोद बाजाज को शामिल कर "प्राथमिकता" पर मदद की। पुरी ने एपस्टीन और हॉफमैन को लंबा ईमेल भेजा: भारत के इंटरनेट सेक्टर (200 मिलियन यूजर्स, 500 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद), मोदी की डिजिटल इंडिया पहल, लिंक्डइन vs नौकरी.कॉम की तुलना। एपस्टीन के सुझाव पर हॉफमैन को भारत जल्दी आने की सलाह दी। पुरी ने इसे "भारत के लिए निवेश का केस" बताया। पुरी ने एपस्टीन को लिखा: "एक्सोटिक आइलैंड से कब लौट रहे हो?" मीटिंग और भारत पर किताबें देने की इच्छा जताई। पुरी ने सफाई दी कि यह स्टाफ के वर्णन पर आधारित था, एपस्टीन के कुख्यात द्वीप से कोई संबंध नहीं। पुरी ने एपस्टीन से पूछा: "शहर में हो? कॉफी के लिए समय?" मीटिंग - एपस्टीन के आवास पर हुई। पुरी ने लिखा: "अगर शहर में हो, तो अपनी किताब 'पेरिलस इंटरवेंशंस' देने आना चाहता हूं।" एपस्टीन के आवास पर मीटिंग हुई। पुरी ने 11 AM आने की पुष्टि की। ईमेल में पुरी ने लिखा: "जेफ, अगर शहर में हो, तो चैट के लिए आना चाहता हूं।" एपस्टीन का जवाब: "कल फोन?"
इन ईमेल्स और मीटिंग्स का जिक्र करने के बाद भी मंत्री मंडल से इस्तीफा न देना मोदी सरकार के लिए कलंक है। जिस साफ-सुथरी छवि और ईमानदारी का मोदी दावा करते हैं, उसी के कैबिनेट में दुनिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल से दोस्ती रखने वाला हरदीप सिंह पुरी कैसे मंत्रीमंडल में अभी तक बना हुआ है यह और दुर्भाग्यपूर्ण है।
13th February, 2026
