यूरीड मीडिया- लखनऊ में रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार सुबह ईओडब्लयू ने उन्हें गोमती नगर स्थित घर से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 12 साले पुराने पशुधन विभाग भर्ती घोटाले में की गई है।
2014 में सपा सरकार के दौरान पशुधन विभाग में 1198 पशुधन प्रसार अधिकारी पदों पर भर्ती हुई थी। उस वक्त योगेश कुमार विभाग में प्रमुख सचिव थे। इसके बाद वे रिटायर हो गए। भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे। जांच में पता चला कि भर्ती में OMR शीट की जांच एक ही जगह कराई गई, जिससे नंबरों में हेरफेर किया जा सके। योगेश कुमार ने गलत तरीके से भर्ती के लिए नियमों में फेरबदल किया। उन्होंने मंडल यानी कमिश्नर को मिलने वाले अधिकार को खत्म कर दिया।
डीजी EOW जय नारायण सिंह ने कहा-
पशुधन भर्ती घोटाले में योगेश कुमार के खिलाफ सबूत मिले हैं। वह जांच में दोषी पाए गए हैं। इसलिए, उनकी गिरफ्तारी की गई।
योगेश कुमार की गिरफ्तारी यूपी में ब्यूरोक्रेट्स में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। इससे पहले 2007 यानी 19 साल पहले मायावती सरकार में मुख्य सचिव रह चुके अखंड प्रताप सिंह को सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार किया था। 2023 में उनका निधन हो गया था।
भर्ती घोटाले का पूरा मामला समझिए-
सहारनपुर को छोड़कर प्रदेश के 17 मंडलों में 1198 पदों पर पशुधन प्रसार अधिकारी की भर्ती हुई थी। परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई। इसमें 1005 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्हें ट्रेनिंग दी गई। जॉइन करवाया गया। भर्ती के बाद 34 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में गड़बड़ी के आरोप लगाए। लिखित परीक्षा के लिए 80 और इंटरव्यू के लिए 20 नंबर तय थे। आरोप था कि इंटरव्यू में दिए गए नंबरों के जरिए कुछ अपात्र अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया। भर्ती नियमों का उल्लंघन किया गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर 17 दिसंबर 2017 को जांच SIT को सौंपी गई। 2018 में एसआईटी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंपी। रिपोर्ट में कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई।
2019 में तत्कालीन निदेशक रहे चरण सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया। 29 जुलाई 2021 को 28 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा कराने वाली संस्था की भूमिका की भी जांच की गई। मामले में तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। हालांकि, फिलहाल भर्ती निरस्त नहीं की गई, जिन लोगों की जॉइनिंग कराई गई, वे आज भी नौकरी कर रहे हैं।
भर्ती परीक्षा में कैसे हुई धांधली?
डीजी EOW जय नारायण सिंह ने बताया कि परीक्षा के बाद नियुक्तियां मंडल स्तर पर होनी थी, लेकिन सारी OMR शीट मुख्यालय मंगा ली गईं। यहीं पर शीट में खेल किया गया। पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान और अपात्र अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया।
मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों को खत्म कर रायबरेली के जिस फिरोज गांधी इंस्टिट्यूट को OMR शीट जांचने की जिम्मेदारी दी गई, उसे इसका कोई अनुभव नहीं था। मामले में डायरेक्टर, एडिशनल डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर की गिरफ्तारी हो चुकी है।
मामले में अब तक 25 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। मामले में तत्कालीन मंत्री भी प्रमुख सचिव के बराबर के दोषी हैं। अभियोजन को सरकार से मंजूरी मिलने के बाद उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।
2016 में मंत्री पद से हटाए गए थे राजकिशोर सिंह
राजकिशोर सिंह भर्ती के समय पशुपालन मंत्री थे। 2016 में मंत्री पद से हटा दिए गए थे। 8 साल तक साइडलाइन रहने के बाद 2024 में भाजपा में शामिल हो गए थे। राजकिशोर सिंह बस्ती से 6 बार विधानसभा और 3 बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इस मामले में तत्कालीन मंत्री पर कार्रवाई के लिए शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगी गई थी। हालांकि, यह स्वीकृति नहीं मिली। ईओडब्ल्यू को किसी भी कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति लेनी पड़ती है।
