यूरीड मीडिया-उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड (यूपीएसआईसी) ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2 करोड़ 67 लाख 60 हजार रुपये का अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) का चेक सौंपा। यह लाभांश वित्तीय वर्ष 2020-21 तक के सात वर्षों के लिए घोषित किया गया था, जिसे निगम के निदेशक मंडल की 267वीं बैठक में 2 अप्रैल 2026 को अनुमोदित किया।
इस अवसर पर निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग और उपाध्यक्ष नटवरलाल गोयल उपस्थित रहे। निगम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उपाध्यक्ष नटवरलाल गोयल ने बताया कि जून 1958 में स्थापित उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की लघु औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल उपलब्ध कराना, उनके उत्पादों का विपणन करना तथा औद्योगिक आस्थानों का निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण करना रहा है। वर्तमान में निगम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।
निगम के अनुसार, वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास एवं रखरखाव, प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेडों का निर्माण, निर्यात संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को विपणन सहायता, गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य तथा विभिन्न सरकारी विभागों की आधारभूत परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश सरकार की रोजगारोन्मुखी नीतियों के अनुरूप युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए नई औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। निगम का दावा है कि इन प्रयासों से प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति मिली है तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
इस दौरान उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम ने मुख्यमंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे। निगम ने अनुरोध किया कि उसे वित्त विभाग के अधीन कार्यदायी संस्थाओं की सूची में भी शामिल किया जाए, ताकि विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों में उसकी भागीदारी बढ़ सके और व्यवसाय का विस्तार हो।
इसके अलावा निगम ने बताया कि कानपुर में फ्लैटेड फैक्ट्री का निर्माण पूरा हो चुका है, आगरा में निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा लखनऊ में भी फ्लैटेड फैक्ट्री परियोजना शुरू की जा रही है। निगम ने आग्रह किया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्रियों के निर्माण हेतु उसे अधिकृत संस्था घोषित किया जाए।
निगम ने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान में बड़े औद्योगिक विकास प्राधिकरण मुख्यतः वृहद औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करते हैं, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए छोटे औद्योगिक आस्थानों के विकास हेतु कोई विशेष एजेंसी नामित नहीं है। ऐसे में उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम को लघु औद्योगिक आस्थानों के विकास के लिए अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया जाना चाहिए।
अंत में निगम ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उसके लंबे अनुभव, कार्यक्षमता और प्रदेश के औद्योगिक विकास में योगदान को देखते हुए इन प्रस्तावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इस अवसर पर निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग और उपाध्यक्ष नटवरलाल गोयल उपस्थित रहे। निगम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उपाध्यक्ष नटवरलाल गोयल ने बताया कि जून 1958 में स्थापित उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की लघु औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल उपलब्ध कराना, उनके उत्पादों का विपणन करना तथा औद्योगिक आस्थानों का निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण करना रहा है। वर्तमान में निगम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।
निगम के अनुसार, वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास एवं रखरखाव, प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेडों का निर्माण, निर्यात संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को विपणन सहायता, गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य तथा विभिन्न सरकारी विभागों की आधारभूत परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश सरकार की रोजगारोन्मुखी नीतियों के अनुरूप युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए नई औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। निगम का दावा है कि इन प्रयासों से प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति मिली है तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
इस दौरान उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम ने मुख्यमंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे। निगम ने अनुरोध किया कि उसे वित्त विभाग के अधीन कार्यदायी संस्थाओं की सूची में भी शामिल किया जाए, ताकि विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों में उसकी भागीदारी बढ़ सके और व्यवसाय का विस्तार हो।
इसके अलावा निगम ने बताया कि कानपुर में फ्लैटेड फैक्ट्री का निर्माण पूरा हो चुका है, आगरा में निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा लखनऊ में भी फ्लैटेड फैक्ट्री परियोजना शुरू की जा रही है। निगम ने आग्रह किया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्रियों के निर्माण हेतु उसे अधिकृत संस्था घोषित किया जाए।
निगम ने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान में बड़े औद्योगिक विकास प्राधिकरण मुख्यतः वृहद औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करते हैं, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए छोटे औद्योगिक आस्थानों के विकास हेतु कोई विशेष एजेंसी नामित नहीं है। ऐसे में उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम को लघु औद्योगिक आस्थानों के विकास के लिए अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया जाना चाहिए।
अंत में निगम ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उसके लंबे अनुभव, कार्यक्षमता और प्रदेश के औद्योगिक विकास में योगदान को देखते हुए इन प्रस्तावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
1st August, 2026
