यूरीड मीडिया- जेफरी एपस्टीन की काली करतूतों का नया खुलासा अब भारतीय राजनीति में तूफान मचा रहा है। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एपस्टीन फाइल्स में कई ऐसे ईमेल और दस्तावेज़ सामने आए हैं, जिनमें भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम बार-बार आ रहा है। ये खुलासे मोदी सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहे हैं, क्योंकि ये 2014 से 2017 तक की अवधि के हैं—जब पुरी भारतीय विदेश सेवा से रिटायर होकर बीजेपी में शामिल हुए थे और बाद में मंत्री बने।
सबसे पहले 2014 का वो विवादित ईमेल मामला। 24 अक्टूबर 2014 को जेफरी एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को ईमेल किया: "हर्दीप, मुझे एक फेवर चाहिए। मेरी असिस्टेंट को भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए जल्दी वीजा चाहिए। क्या कांसुलेट में कोई है जिससे वो बात कर सकती है?" एपस्टीन उस वक्त पहले से ही 2008 में सेक्स क्राइम के लिए दोषी ठहराया जा चुका था, और उसकी कुख्याती पूरी दुनिया को पता थी। फिर भी पुरी ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने पूर्व भारतीय राजदूत प्रमोद कुमार बजाज (जो तब उनके साथ काम कर रहे थे) और एक संजीव नाम के व्यक्ति को ईमेल फॉरवर्ड किया, और वीजा प्रक्रिया को प्राथमिकता पर करवाने की कोशिश की।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पर सवाल उठाए हैं: जब एपस्टीन पहले से ही यौन अपराधी घोषित था, तो पुरी ने उसके सहयोगी को वीजा दिलाने के लिए डिप्लोमेटिक प्रभाव का इस्तेमाल क्यों किया? क्या उन्होंने बाद में जांच की कि वो महिला सच में शादी के लिए आ रही थी या कोई और मकसद था? क्या इससे भारत की सुरक्षा या गरिमा को खतरा तो नहीं पहुंचा? और सबसे बड़ा सवाल—पुरी को एपस्टीन से क्या मिला कि वे इतनी जल्दबाजी में हदें पार कर रहे थे?
पुरी ने पहले दावा किया था कि एपस्टीन से उनकी बातचीत सिर्फ डिजिटल इंडिया को प्रमोट करने तक सीमित थी। लेकिन फाइल्स में कई ईमेल दिखाते हैं कि बातचीत ज्यादा गहरी थी—एपस्टीन ने पुरी को लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन से जोड़ा, भारत में निवेश के मौके बताए गए, और पुरी ने एपस्टीन को "एक्सोटिक आइलैंड" से वापस आने पर मिलने की बात की, किताबें देने की पेशकश की।
दूसरा बड़ा खुलासा है पुरी का इंटरनेशनल पीस इंस्टिट्यूट (आईपीआई) से जुड़ाव। 2013 में आईएफएस से रिटायर होने के बाद पुरी इस न्यूयॉर्क स्थित संस्था में वाइस प्रेसिडेंट और सलाहकार बने। इसका अध्यक्ष था नॉर्वेजियन डिप्लोमेट टेरजे रॉड लार्सन—जो एपस्टीन का करीबी था। फाइल्स में एक 2015 का ईमेल सामने आया, जिसमें लार्सन ने एपस्टीन को लिखा: "क्या तुमने ये कहावत सुनी है—अगर एक सांप और एक इंडियन साथ दिखें, तो पहले इंडियन को मारना चाहिए।" ये नस्लवादी टिप्पणी भारतीयों को सांप से भी बदतर बताती है। लार्सन ने 2020 में एपस्टीन लिंक के कारण आईपीआई से इस्तीफा दिया, लेकिन पुरी उसी संस्था में ऊंचे पद पर थे—और 2017 में मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद भी एपस्टीन से संपर्क जारी रहा। फाइल्स में कम से कम तीन मुलाकातें दर्ज हैं: फरवरी 2015, जनवरी 2016 और मई 2017 में एपस्टीन के न्यूयॉर्क घर पर।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने इन ईमेल्स के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए। इसके बाद पुरी ने उन्हें फोन कर ट्वीट डिलीट करने को कहा और धमकाया कि अगर नहीं किया तो "कुछ लोग उनके पीछे पड़ सकते हैं" और वे मदद नहीं कर पाएंगे। महुआ ने इसे सार्वजनिक किया और कहा कि वे न तो डरती हैं और न ट्वीट हटाएंगी। अब एक्स पर फर्जी चैट्स वायरल हो रहे हैं, जिन्हें महुआ ने पुरी के इशारे पर बताया है और उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करा रही हैं।
ये खुलासे सवाल खड़े करते हैं: एक मंत्री, जो भारतीयों की गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं, एक ऐसे व्यक्ति की संस्था में क्यों काम कर रहे थे जिसके अध्यक्ष भारतीयों को सांप से बदतर मानते थे? और एक घोषित सेक्स अपराधी की मदद के लिए डिप्लोमेटिक चैनल क्यों इस्तेमाल किए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब अपने कैबिनेट सहयोगी पर क्या एक्शन लेना है—ये देखना बाकी है। लेकिन ये फाइल्स मोदी सरकार के लिए नई चुनौती बन चुकी हैं।
सबसे पहले 2014 का वो विवादित ईमेल मामला। 24 अक्टूबर 2014 को जेफरी एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को ईमेल किया: "हर्दीप, मुझे एक फेवर चाहिए। मेरी असिस्टेंट को भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए जल्दी वीजा चाहिए। क्या कांसुलेट में कोई है जिससे वो बात कर सकती है?" एपस्टीन उस वक्त पहले से ही 2008 में सेक्स क्राइम के लिए दोषी ठहराया जा चुका था, और उसकी कुख्याती पूरी दुनिया को पता थी। फिर भी पुरी ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने पूर्व भारतीय राजदूत प्रमोद कुमार बजाज (जो तब उनके साथ काम कर रहे थे) और एक संजीव नाम के व्यक्ति को ईमेल फॉरवर्ड किया, और वीजा प्रक्रिया को प्राथमिकता पर करवाने की कोशिश की।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पर सवाल उठाए हैं: जब एपस्टीन पहले से ही यौन अपराधी घोषित था, तो पुरी ने उसके सहयोगी को वीजा दिलाने के लिए डिप्लोमेटिक प्रभाव का इस्तेमाल क्यों किया? क्या उन्होंने बाद में जांच की कि वो महिला सच में शादी के लिए आ रही थी या कोई और मकसद था? क्या इससे भारत की सुरक्षा या गरिमा को खतरा तो नहीं पहुंचा? और सबसे बड़ा सवाल—पुरी को एपस्टीन से क्या मिला कि वे इतनी जल्दबाजी में हदें पार कर रहे थे?
पुरी ने पहले दावा किया था कि एपस्टीन से उनकी बातचीत सिर्फ डिजिटल इंडिया को प्रमोट करने तक सीमित थी। लेकिन फाइल्स में कई ईमेल दिखाते हैं कि बातचीत ज्यादा गहरी थी—एपस्टीन ने पुरी को लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन से जोड़ा, भारत में निवेश के मौके बताए गए, और पुरी ने एपस्टीन को "एक्सोटिक आइलैंड" से वापस आने पर मिलने की बात की, किताबें देने की पेशकश की।
दूसरा बड़ा खुलासा है पुरी का इंटरनेशनल पीस इंस्टिट्यूट (आईपीआई) से जुड़ाव। 2013 में आईएफएस से रिटायर होने के बाद पुरी इस न्यूयॉर्क स्थित संस्था में वाइस प्रेसिडेंट और सलाहकार बने। इसका अध्यक्ष था नॉर्वेजियन डिप्लोमेट टेरजे रॉड लार्सन—जो एपस्टीन का करीबी था। फाइल्स में एक 2015 का ईमेल सामने आया, जिसमें लार्सन ने एपस्टीन को लिखा: "क्या तुमने ये कहावत सुनी है—अगर एक सांप और एक इंडियन साथ दिखें, तो पहले इंडियन को मारना चाहिए।" ये नस्लवादी टिप्पणी भारतीयों को सांप से भी बदतर बताती है। लार्सन ने 2020 में एपस्टीन लिंक के कारण आईपीआई से इस्तीफा दिया, लेकिन पुरी उसी संस्था में ऊंचे पद पर थे—और 2017 में मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद भी एपस्टीन से संपर्क जारी रहा। फाइल्स में कम से कम तीन मुलाकातें दर्ज हैं: फरवरी 2015, जनवरी 2016 और मई 2017 में एपस्टीन के न्यूयॉर्क घर पर।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने इन ईमेल्स के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए। इसके बाद पुरी ने उन्हें फोन कर ट्वीट डिलीट करने को कहा और धमकाया कि अगर नहीं किया तो "कुछ लोग उनके पीछे पड़ सकते हैं" और वे मदद नहीं कर पाएंगे। महुआ ने इसे सार्वजनिक किया और कहा कि वे न तो डरती हैं और न ट्वीट हटाएंगी। अब एक्स पर फर्जी चैट्स वायरल हो रहे हैं, जिन्हें महुआ ने पुरी के इशारे पर बताया है और उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करा रही हैं।
ये खुलासे सवाल खड़े करते हैं: एक मंत्री, जो भारतीयों की गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं, एक ऐसे व्यक्ति की संस्था में क्यों काम कर रहे थे जिसके अध्यक्ष भारतीयों को सांप से बदतर मानते थे? और एक घोषित सेक्स अपराधी की मदद के लिए डिप्लोमेटिक चैनल क्यों इस्तेमाल किए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब अपने कैबिनेट सहयोगी पर क्या एक्शन लेना है—ये देखना बाकी है। लेकिन ये फाइल्स मोदी सरकार के लिए नई चुनौती बन चुकी हैं।
6th February, 2026
