यूरीड मीडिया- 5 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा- पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश के लोगों को समस्या माना। पीएम ने बिना नाम लिए राहुल और उनके परिवार पर आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया।
पीएम मोदी के ऐसे ही 4 बड़े बयान और उनके पीछे की कहानी-
बयान-1: नेहरू-इंदिरा ने देश के लोगों को समस्या माना
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘हमारी और कांग्रेस की अप्रोच में जमीन-आसमान का अंतर है। देश के नौजवानों पर हमें भरोसा है। कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है। एक बार इंदिरा जी ईरान में भाषण दे रहीं थी। उन्होंने नेहरू जी के साथ बातचीत का उल्लेख किया, 'जब किसी ने मेरे पिता जी से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं तो उन्होंने कहा 35 करोड़।' उस समय हमारे देश की जनसंख्या 35 करोड़ थी।’
‘इंदिरा जी ने आगे कहा- आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है। मेरी समस्याओं की संख्या भी इतनी ही बड़ी है।’ कोई ऐसा हो सकता है कि अपने देश के लोगों को समस्या मानें? ये लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं।’
सच्चाई क्या है?
पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के भाषणों और पत्रों के संग्रह 'द नेहरू आर्काइव' में नेहरू के 16 जनवरी 1957 को कोलकाता में दिए भाषण का जिक्र मिलता है। इसमें उन्होंने भारत की आबादी और भारत की समस्या का जिक्र किया था।
नेहरू कहते हैं, 'इंग्लैंड में एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि भारत की समस्या क्या है? मैंने जवाब दिया कि भारत में 36 करोड़ परेशानियां है। देश का हर पुरुष और स्त्री एक समस्या है। उन सभी का ध्यान रखना होगा।’
नेहरू आगे कहते हैं, ‘लेकिन फिलहाल, हमारे सामने दो तरह की समस्याएं हैं। एक देश के अंदर समस्या है और दूसरी बाहरी समस्या। यह हमारा कर्तव्य है कि हम पहले अपने देश को व्यवस्थित करें और जनता की स्थिति में सुधार करें।'
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक इस घटना का जिक्र इंदिरा गांधी ने ईरान में दिए एक भाषण में किया था। इंदिरा गांधी ने 1974 में अपना अकेला ईरान दौरा किया था।
हमने इस दौरे पर उनके भाषण खोजने की कोशिश की, लेकिन हमें ऐसा कोई भाषण नहीं मिल सका, जहां इंदिरा ने कहा हो कि देश के 57 करोड़ लोग उनकी समस्या हैं।
बयान-2: 'महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया'
पीएम मोदी ने क्या कहा- नेहरू-गांधी परिवार का नाम लिए बिना पीएम बोले, ‘चोरी इनका खानदानी पेशा है। इन्होंने महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया।’
सच्चाई क्या है?
जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के बीच किसी तरह का पारिवारिक रिश्ता नहीं है।
शादी से पहले इंदिरा गांधी का नाम इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरू था। 26 मार्च 1942 को उनकी शादी फिरोज गांधी से हुई।
फिरोज एक पारसी परिवार में जन्मे थे। जन्म के वक्त उनका नाम फिरोज घांडी (Ghandy) था। हालांकि 1930 में महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम बदलकर फिरोज गांधी (Gandhi ) कर लिया था। फिरोज और महात्मा गांधी में कोई परिवारिक रिश्ता नहीं था।
ज्यादातर भारतीय परिवारों में महिलाओं की शादी के बाद पति का सरनेम इस्तेमाल करना एक आम बात है। फिरोज से शादी होने के बाद से इंदिरा ने भी गांधी सरनेम लगाना शुरू कर दिया।
फिरोज-इंदिरा के बेटे- संजय और राजीव ने भी गांधी सरनेम लगाया। फिर उनकी संतानों राहुल, प्रियंका और वरुण ने भी गांधी सरनेम लगाया।
बयान-3: ‘मोहब्बत की दुकान वाले मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगा रहे’
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘मोहब्बत की दुकान खोलने वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लगा रहे हैं। ये कौन सी दुकान है जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं? ये कौन से संविधान से सीखा है, जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं?’
सच्चाई क्या है?
राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू की। इसके 100 दिन पूरे होने पर राजस्थान के अलवर में राहुल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोल रहा हूं।’
23 फरवरी 2023 को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट में गिरफ्तार किया। तब उनके और रणदीप सुरजेवाला के सामने कांग्रेसी नेताओं ने नारा लगाया- ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी।’
अगले दिन जब पीएम मोदी शिलॉन्ग पहुंचे तो उन्होंने कहा, 'कुछ लोग जिनको देश ने नकार दिया है, वो आजकल माला जपते हैं और कह रहे हैं कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी।'
फिर 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली हुई। इससे पहले कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें कांग्रेसी कार्यकर्ता 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगाते दिखे। इस पर बीजेपी की ओर से आपत्ति जताई गई।
5 फरवरी 2026 को JNU के साबरमती हॉस्टल के सामने भी नारे लगे- ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी।’ हालांकि इसमें कांग्रेस का कोई जुड़ाव नहीं था।
बयान-4: सरदार सरोवर प्रोजेक्ट नेहरु ने शुरु किया, दशकों बाद मैंने पूरा किया
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘सरदार पटेल ने इसका सपना देखा था, नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी थी, और कई दशकों बाद मैंने इसका उद्घाटन किया। यही कांग्रेस की हालत है। वे सिर्फ कल्पना करते हैं, लेकिन उसे लागू नहीं कर पाते। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब इस प्रोजेक्ट के लिए मुझे 3 दिन अनशन पर बैठना पड़ा था। ’
सच्चाई क्या है?
1930 के दशक में इंजीनियर एम.एच. दस्तूर ने गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया के पास एक बड़े बैराज बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गुजरात में पानी की समस्या को देखते हुए इस प्रोजेक्ट पर जोर दिया।
5 अप्रैल 1961 को पीएम जवाहरलाल नेहरू ने इस परियोजना की नींव रखी।
शुरुआत में राज्यों के बीच पानी के बंटवारे के मुद्दे पर बहस के चलते लगभग एक दशक तक कोई काम नहीं हो सका। 1979 में वर्ल्ड बैंक की मदद से इसे आगे बढ़ाया गया और 200 मिलियन डॉलर का कर्ज मिला।
इसका निर्माण 1987 में शुरू हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों के विस्थापन के मुद्दे और ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के बाद 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने काम रोक दिया।
2000-01 में परियोजना दोबारा शुरू हुई और बांध की ऊंचाई पहले 111 मीटर, फिर 123 मीटर और आखिर में 2017 में 139 मीटर कर दी गई।
2006 में गुजरात में लोग सरदार सरोवर डैम की ऊंचाई बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को डैम की ऊंचाई तय करने के लिए कहा था।
उस समय गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी का आरोप था कि केंद्र सरकार फैसला लेने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार को मामले में रुख साफ करना होगा।
इसी मांग को लेकर वह 16 अप्रैल 2006 से 51 घंटे के अनशन पर बैठे थे।
सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन 17 सितंबर 2017 को पीएम मोदी ने किया था।
पीएम मोदी के ऐसे ही 4 बड़े बयान और उनके पीछे की कहानी-
बयान-1: नेहरू-इंदिरा ने देश के लोगों को समस्या माना
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘हमारी और कांग्रेस की अप्रोच में जमीन-आसमान का अंतर है। देश के नौजवानों पर हमें भरोसा है। कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है। एक बार इंदिरा जी ईरान में भाषण दे रहीं थी। उन्होंने नेहरू जी के साथ बातचीत का उल्लेख किया, 'जब किसी ने मेरे पिता जी से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं तो उन्होंने कहा 35 करोड़।' उस समय हमारे देश की जनसंख्या 35 करोड़ थी।’
‘इंदिरा जी ने आगे कहा- आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है। मेरी समस्याओं की संख्या भी इतनी ही बड़ी है।’ कोई ऐसा हो सकता है कि अपने देश के लोगों को समस्या मानें? ये लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं।’
सच्चाई क्या है?
पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के भाषणों और पत्रों के संग्रह 'द नेहरू आर्काइव' में नेहरू के 16 जनवरी 1957 को कोलकाता में दिए भाषण का जिक्र मिलता है। इसमें उन्होंने भारत की आबादी और भारत की समस्या का जिक्र किया था।
नेहरू कहते हैं, 'इंग्लैंड में एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि भारत की समस्या क्या है? मैंने जवाब दिया कि भारत में 36 करोड़ परेशानियां है। देश का हर पुरुष और स्त्री एक समस्या है। उन सभी का ध्यान रखना होगा।’
नेहरू आगे कहते हैं, ‘लेकिन फिलहाल, हमारे सामने दो तरह की समस्याएं हैं। एक देश के अंदर समस्या है और दूसरी बाहरी समस्या। यह हमारा कर्तव्य है कि हम पहले अपने देश को व्यवस्थित करें और जनता की स्थिति में सुधार करें।'
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक इस घटना का जिक्र इंदिरा गांधी ने ईरान में दिए एक भाषण में किया था। इंदिरा गांधी ने 1974 में अपना अकेला ईरान दौरा किया था।
हमने इस दौरे पर उनके भाषण खोजने की कोशिश की, लेकिन हमें ऐसा कोई भाषण नहीं मिल सका, जहां इंदिरा ने कहा हो कि देश के 57 करोड़ लोग उनकी समस्या हैं।
बयान-2: 'महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया'
पीएम मोदी ने क्या कहा- नेहरू-गांधी परिवार का नाम लिए बिना पीएम बोले, ‘चोरी इनका खानदानी पेशा है। इन्होंने महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया।’
सच्चाई क्या है?
जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के बीच किसी तरह का पारिवारिक रिश्ता नहीं है।
शादी से पहले इंदिरा गांधी का नाम इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरू था। 26 मार्च 1942 को उनकी शादी फिरोज गांधी से हुई।
फिरोज एक पारसी परिवार में जन्मे थे। जन्म के वक्त उनका नाम फिरोज घांडी (Ghandy) था। हालांकि 1930 में महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम बदलकर फिरोज गांधी (Gandhi ) कर लिया था। फिरोज और महात्मा गांधी में कोई परिवारिक रिश्ता नहीं था।
ज्यादातर भारतीय परिवारों में महिलाओं की शादी के बाद पति का सरनेम इस्तेमाल करना एक आम बात है। फिरोज से शादी होने के बाद से इंदिरा ने भी गांधी सरनेम लगाना शुरू कर दिया।
फिरोज-इंदिरा के बेटे- संजय और राजीव ने भी गांधी सरनेम लगाया। फिर उनकी संतानों राहुल, प्रियंका और वरुण ने भी गांधी सरनेम लगाया।
बयान-3: ‘मोहब्बत की दुकान वाले मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगा रहे’
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘मोहब्बत की दुकान खोलने वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लगा रहे हैं। ये कौन सी दुकान है जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं? ये कौन से संविधान से सीखा है, जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं?’
सच्चाई क्या है?
राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू की। इसके 100 दिन पूरे होने पर राजस्थान के अलवर में राहुल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोल रहा हूं।’
23 फरवरी 2023 को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट में गिरफ्तार किया। तब उनके और रणदीप सुरजेवाला के सामने कांग्रेसी नेताओं ने नारा लगाया- ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी।’
अगले दिन जब पीएम मोदी शिलॉन्ग पहुंचे तो उन्होंने कहा, 'कुछ लोग जिनको देश ने नकार दिया है, वो आजकल माला जपते हैं और कह रहे हैं कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी।'
फिर 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली हुई। इससे पहले कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें कांग्रेसी कार्यकर्ता 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगाते दिखे। इस पर बीजेपी की ओर से आपत्ति जताई गई।
5 फरवरी 2026 को JNU के साबरमती हॉस्टल के सामने भी नारे लगे- ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी।’ हालांकि इसमें कांग्रेस का कोई जुड़ाव नहीं था।
बयान-4: सरदार सरोवर प्रोजेक्ट नेहरु ने शुरु किया, दशकों बाद मैंने पूरा किया
पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘सरदार पटेल ने इसका सपना देखा था, नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी थी, और कई दशकों बाद मैंने इसका उद्घाटन किया। यही कांग्रेस की हालत है। वे सिर्फ कल्पना करते हैं, लेकिन उसे लागू नहीं कर पाते। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब इस प्रोजेक्ट के लिए मुझे 3 दिन अनशन पर बैठना पड़ा था। ’
सच्चाई क्या है?
1930 के दशक में इंजीनियर एम.एच. दस्तूर ने गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया के पास एक बड़े बैराज बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गुजरात में पानी की समस्या को देखते हुए इस प्रोजेक्ट पर जोर दिया।
5 अप्रैल 1961 को पीएम जवाहरलाल नेहरू ने इस परियोजना की नींव रखी।
शुरुआत में राज्यों के बीच पानी के बंटवारे के मुद्दे पर बहस के चलते लगभग एक दशक तक कोई काम नहीं हो सका। 1979 में वर्ल्ड बैंक की मदद से इसे आगे बढ़ाया गया और 200 मिलियन डॉलर का कर्ज मिला।
इसका निर्माण 1987 में शुरू हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों के विस्थापन के मुद्दे और ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के बाद 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने काम रोक दिया।
2000-01 में परियोजना दोबारा शुरू हुई और बांध की ऊंचाई पहले 111 मीटर, फिर 123 मीटर और आखिर में 2017 में 139 मीटर कर दी गई।
2006 में गुजरात में लोग सरदार सरोवर डैम की ऊंचाई बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को डैम की ऊंचाई तय करने के लिए कहा था।
उस समय गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी का आरोप था कि केंद्र सरकार फैसला लेने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार को मामले में रुख साफ करना होगा।
इसी मांग को लेकर वह 16 अप्रैल 2006 से 51 घंटे के अनशन पर बैठे थे।
सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन 17 सितंबर 2017 को पीएम मोदी ने किया था।
6th February, 2026
