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बुआ-भतीजे का रागालाप...

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बुआ-भतीजे का रागालाप...

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विजय शंकर पंकज (यूरिड मीडिया)

लखनऊ। पूरा प्रदेश जब मई माह की चिलचिलाती गरमी और उमस से परेशान है तो उत्तर प्रदेश की राजनीति के "बुआ-भतीजे" (मायावती-अखिलेश) बसन्तोत्सव का रागालाप करने में जुटे है। यह प्रदेश की राजनीति का वह दौर है जब महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह के धराशायी होने पर कौरव सेना को लगातार पराजय का सामना कर पड़ रहा था ऐसे में सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए द्रोणाचार्य ने "चक्रब्यूह" की रचना की। विपरीत विचारधारा के होते हुए भी द्रोणाचार्य और दुर्योधन की यह युक्ति दोनांे के ही स्वार्थो से बंधी थी। बुआ-भतीजे का यह रागालाप भी कुछ ऐसे ही स्वार्थ के ताने-बाने से बुना जा रहा है। बुआ-भतीजे का यह रागालाप वर्तमान संगीत का वह नया घालमेल स्वरूप है जिसकी मिसाल इतिहास में बहुत कम ही दिखने को मिलती है।