लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने वाली लखनऊ स्मार्ट सिटी मिशन की महत्वाकांक्षी 'हेल्थ एटीएम' परियोजना इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के प्रबंधन में चल रही इस योजना के तकनीकी और सहायक कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सेवाएं ठप होने की कगार पर
शहर के व्यस्त चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे इन हेल्थ एटीएम मशीनों का मकसद आम नागरिकों को कुछ ही मिनटों में ब्लड प्रेशर, ईसीजी, ब्लड शुगर, वजन जैसी बुनियादी स्वास्थ्य जांचें मुहैया कराना है। लेकिन कर्मचारियों की आर्थिक बदहाली अब इस सेवा को सीधे प्रभावित कर रही है। कई कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण केंद्रों पर नियमित रूप से आने में असमर्थ हो गए हैं, जिससे जनता को मिलने वाली त्वरित स्वास्थ्य सुविधा पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है।
कर्मचारियों का आक्रोश और प्रशासन की सुस्ती
कर्मचारियों का आरोप है कि वे वेतन भुगतान के लिए कई बार उच्चाधिकारियों के पास गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें बजट की कमी का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “चार महीने से वेतन नहीं मिला है। बच्चों की स्कूल फीस और घर का किराया देना मुश्किल हो गया है। हम लोग कैसे परिवार चलाएं?”
सूत्रों के मुताबिक, समस्या की जड़ स्मार्ट सिटी प्रशासन और SGPGI के बीच फंड ट्रांसफर एवं समन्वय की कमी में है। फाइलों के चक्कर में वे लोग फंस गए हैं, जिनका काम शहरवासियों को सेहतमंद रखना है।
कार्य बहिष्कार की चेतावनी
परेशान कर्मचारियों ने अब सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दे दी है कि अगर जल्द ही उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे पूर्ण कार्य बहिष्कार (कार्य बहिष्कार) और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की राह पर चल पड़ेंगे। कर्मचारी संघ ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यह परियोजना लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य आम आदमी को घर के नजदीक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन फंडिंग और प्रशासनिक पेचीदगियों ने अब इसकी सेहत बिगाड़ दी है।
सेवाएं ठप होने की कगार पर
शहर के व्यस्त चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे इन हेल्थ एटीएम मशीनों का मकसद आम नागरिकों को कुछ ही मिनटों में ब्लड प्रेशर, ईसीजी, ब्लड शुगर, वजन जैसी बुनियादी स्वास्थ्य जांचें मुहैया कराना है। लेकिन कर्मचारियों की आर्थिक बदहाली अब इस सेवा को सीधे प्रभावित कर रही है। कई कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण केंद्रों पर नियमित रूप से आने में असमर्थ हो गए हैं, जिससे जनता को मिलने वाली त्वरित स्वास्थ्य सुविधा पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है।
कर्मचारियों का आक्रोश और प्रशासन की सुस्ती
कर्मचारियों का आरोप है कि वे वेतन भुगतान के लिए कई बार उच्चाधिकारियों के पास गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें बजट की कमी का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “चार महीने से वेतन नहीं मिला है। बच्चों की स्कूल फीस और घर का किराया देना मुश्किल हो गया है। हम लोग कैसे परिवार चलाएं?”
सूत्रों के मुताबिक, समस्या की जड़ स्मार्ट सिटी प्रशासन और SGPGI के बीच फंड ट्रांसफर एवं समन्वय की कमी में है। फाइलों के चक्कर में वे लोग फंस गए हैं, जिनका काम शहरवासियों को सेहतमंद रखना है।
कार्य बहिष्कार की चेतावनी
परेशान कर्मचारियों ने अब सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दे दी है कि अगर जल्द ही उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे पूर्ण कार्य बहिष्कार (कार्य बहिष्कार) और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की राह पर चल पड़ेंगे। कर्मचारी संघ ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यह परियोजना लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य आम आदमी को घर के नजदीक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन फंडिंग और प्रशासनिक पेचीदगियों ने अब इसकी सेहत बिगाड़ दी है।
7th April, 2026
