राजेन्द्र द्विवेदी- देश में इस समय चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इन सबमें सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है। उसके बाद केरल, तमिलनाडु और असम का नाम आता है। पाँचवाँ केंद्र शासित प्रदेश है पुदुचेरी। जहाँ 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा।
पुदुचेरी जिसे पहले पांडिचेरी कहा जाता था, 1 नवंबर 1954 को भारत में शामिल किया गया था और 1962 में इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। यह तमिलनाडु से लगा हुआ बेहद खूबसूरत समुद्री क्षेत्र है। चेन्नई से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह पर रास्ते में प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल महाबलीपुरम पड़ता है। यहाँ की यात्रा बेहद मनमोहक होती है। सड़क के दोनों ओर फैली हरी-भरी हरियाली, समुद्र की ठंडी हवा और प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। पुदुचेरी अपने आप में शांत, आकर्षक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत सुंदर है।
पुदुचेरी विधानसभा में कुल 30 विधानसभा सीटें हैं, जिनके अलावा 3 नामित सदस्य भी होते हैं। सीटों की संख्या कम होने के कारण यहाँ छोटे-छोटे बदलाव भी सरकार बना या बिगाड़ सकते हैं। वर्तमान में यहाँ के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी हैं, जो ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के अध्यक्ष भी हैं। वे पहले कांग्रेस में थे, लेकिन 2006 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाई। 2011 से वे मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं। 2021 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन किया था। उस समय AINRC को 10 सीटें और भाजपा को 6 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस और डीएमके के गठबंधन को कुल 8 सीटें मिली थीं।
इस बार चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। तीन मुख्य मोर्चे बन गए हैं। पहला एनडीए गठबंधन है, जिसमें एन. रंगासामी की AINRC और भाजपा साथ हैं। दूसरा सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस है, जिसमें कांग्रेस 16 सीटों पर और डीएमके 14 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। तीसरा मोर्चा तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) का है, जिसके नेता मशहूर फिल्म अभिनेता विजय हैं। विजय इस बार पुदुचेरी में भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी टीवीके ने 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और एक स्थानीय पार्टी को 2 सीटें दी हैं। इस तरह पहली बार यहाँ तीनों तरफ से मजबूत चुनौती है, जिससे चुनाव त्रिकोणीय हो गया है।
पुदुचेरी की जनता की दो सबसे बड़ी माँगें लंबे समय से उठ रही हैं। पहली है केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा। दूसरी है बेरोजगारी की समस्या। केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी दिल्ली के गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे विकास की गति प्रभावित होती है। वहीं शिक्षा की अच्छी व्यवस्था होने के बावजूद यहाँ पढ़े-लिखे युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
मुख्यमंत्री रंगासामी इन दोनों मुद्दों पर जोर देते हुए कहते हैं कि केंद्र सरकार के सहयोग से वे बेरोजगारी दूर करेंगे, उद्योग लगाएंगे और राज्य का दर्जा दिलाने का भी पूरा प्रयास करेंगे।
रंगासामी सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर खासा भरोसा जताती है। यहाँ 18 से 59 वर्ष तक के हर व्यक्ति को दो हजार पाँच सौ रुपये प्रतिमाह धनराशि दी जाती है। 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को चार हजार रुपये पेंशन मिलती है। कक्षा छह से बारहवीं तक के सभी छात्रों को एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। बेटी के जन्म पर पचास हजार रुपये तुरंत जमा किए जाते हैं। इसके अलावा गैस सिलेंडर पर सब्सिडी, फ्री राशन और बेरोजगारी भत्ता जैसी कई योजनाएँ चल रही हैं। छोटी आबादी होने के कारण ये योजनाएँ अच्छी तरह से लागू हो रही हैं और लोगों तक समय पर पहुँच रही हैं।
दूसरी तरफ विपक्ष कांग्रेस और डीएमके सत्ता विरोधी लहर, विकास की अपेक्षाओं और राज्य के दर्जे के मुद्दे पर वोट माँग रहा है। फिल्म अभिनेता विजय की एंट्री ने पूरे चुनाव को और रोचक बना दिया है। उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने वाली बड़ी घोषणाएँ की हैं। उन्होंने कहा है कि पुदुचेरी को फिल्म हब, फिल्म पर्यटन और हेल्थ हब बनाया जाएगा। साथ ही बेरोजगारी दूर करने के ठोस कदम भी उठाए जाएंगे। विजय की लोकप्रियता युवाओं में काफी है और उनकी पार्टी पहली बार 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पुदुचेरी छोटा केंद्र शासित प्रदेश जरूर है, लेकिन यहाँ की जनता पढ़ी-लिखी, जागरूक और पर्यटन के कारण काफी समझदार मानी जाती है। एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं और केंद्र के सहयोग पर भरोसा जता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष विकास की अपेक्षाओं पर हमलावर है। विजय की एंट्री से सियासी समीकरण त्रिकोणीय हो गया है। अभी सत्ता के खिलाफ कुछ नाराजगी दिख रही है, लेकिन रंगासामी सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं के बल पर वापसी की उम्मीद कर रही है। 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और 4 मई 2026 को परिणाम आएगा। उस दिन पता चलेगा कि इस खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश की जनता किसके पक्ष में फैसला करती है। क्या सत्ता बरकरार रहेगी या त्रिकोणीय लड़ाई नया समीकरण रचेगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
पुदुचेरी जिसे पहले पांडिचेरी कहा जाता था, 1 नवंबर 1954 को भारत में शामिल किया गया था और 1962 में इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। यह तमिलनाडु से लगा हुआ बेहद खूबसूरत समुद्री क्षेत्र है। चेन्नई से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह पर रास्ते में प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल महाबलीपुरम पड़ता है। यहाँ की यात्रा बेहद मनमोहक होती है। सड़क के दोनों ओर फैली हरी-भरी हरियाली, समुद्र की ठंडी हवा और प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। पुदुचेरी अपने आप में शांत, आकर्षक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत सुंदर है।
पुदुचेरी विधानसभा में कुल 30 विधानसभा सीटें हैं, जिनके अलावा 3 नामित सदस्य भी होते हैं। सीटों की संख्या कम होने के कारण यहाँ छोटे-छोटे बदलाव भी सरकार बना या बिगाड़ सकते हैं। वर्तमान में यहाँ के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी हैं, जो ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के अध्यक्ष भी हैं। वे पहले कांग्रेस में थे, लेकिन 2006 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाई। 2011 से वे मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं। 2021 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन किया था। उस समय AINRC को 10 सीटें और भाजपा को 6 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस और डीएमके के गठबंधन को कुल 8 सीटें मिली थीं।
इस बार चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। तीन मुख्य मोर्चे बन गए हैं। पहला एनडीए गठबंधन है, जिसमें एन. रंगासामी की AINRC और भाजपा साथ हैं। दूसरा सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस है, जिसमें कांग्रेस 16 सीटों पर और डीएमके 14 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। तीसरा मोर्चा तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) का है, जिसके नेता मशहूर फिल्म अभिनेता विजय हैं। विजय इस बार पुदुचेरी में भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी टीवीके ने 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और एक स्थानीय पार्टी को 2 सीटें दी हैं। इस तरह पहली बार यहाँ तीनों तरफ से मजबूत चुनौती है, जिससे चुनाव त्रिकोणीय हो गया है।
पुदुचेरी की जनता की दो सबसे बड़ी माँगें लंबे समय से उठ रही हैं। पहली है केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा। दूसरी है बेरोजगारी की समस्या। केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी दिल्ली के गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे विकास की गति प्रभावित होती है। वहीं शिक्षा की अच्छी व्यवस्था होने के बावजूद यहाँ पढ़े-लिखे युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
मुख्यमंत्री रंगासामी इन दोनों मुद्दों पर जोर देते हुए कहते हैं कि केंद्र सरकार के सहयोग से वे बेरोजगारी दूर करेंगे, उद्योग लगाएंगे और राज्य का दर्जा दिलाने का भी पूरा प्रयास करेंगे।
रंगासामी सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर खासा भरोसा जताती है। यहाँ 18 से 59 वर्ष तक के हर व्यक्ति को दो हजार पाँच सौ रुपये प्रतिमाह धनराशि दी जाती है। 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को चार हजार रुपये पेंशन मिलती है। कक्षा छह से बारहवीं तक के सभी छात्रों को एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। बेटी के जन्म पर पचास हजार रुपये तुरंत जमा किए जाते हैं। इसके अलावा गैस सिलेंडर पर सब्सिडी, फ्री राशन और बेरोजगारी भत्ता जैसी कई योजनाएँ चल रही हैं। छोटी आबादी होने के कारण ये योजनाएँ अच्छी तरह से लागू हो रही हैं और लोगों तक समय पर पहुँच रही हैं।
दूसरी तरफ विपक्ष कांग्रेस और डीएमके सत्ता विरोधी लहर, विकास की अपेक्षाओं और राज्य के दर्जे के मुद्दे पर वोट माँग रहा है। फिल्म अभिनेता विजय की एंट्री ने पूरे चुनाव को और रोचक बना दिया है। उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने वाली बड़ी घोषणाएँ की हैं। उन्होंने कहा है कि पुदुचेरी को फिल्म हब, फिल्म पर्यटन और हेल्थ हब बनाया जाएगा। साथ ही बेरोजगारी दूर करने के ठोस कदम भी उठाए जाएंगे। विजय की लोकप्रियता युवाओं में काफी है और उनकी पार्टी पहली बार 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पुदुचेरी छोटा केंद्र शासित प्रदेश जरूर है, लेकिन यहाँ की जनता पढ़ी-लिखी, जागरूक और पर्यटन के कारण काफी समझदार मानी जाती है। एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं और केंद्र के सहयोग पर भरोसा जता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष विकास की अपेक्षाओं पर हमलावर है। विजय की एंट्री से सियासी समीकरण त्रिकोणीय हो गया है। अभी सत्ता के खिलाफ कुछ नाराजगी दिख रही है, लेकिन रंगासामी सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं के बल पर वापसी की उम्मीद कर रही है। 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और 4 मई 2026 को परिणाम आएगा। उस दिन पता चलेगा कि इस खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश की जनता किसके पक्ष में फैसला करती है। क्या सत्ता बरकरार रहेगी या त्रिकोणीय लड़ाई नया समीकरण रचेगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
30th March, 2026
