यूरीड मीडिया- राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के सामने चढ़ावा चोरी की घटना के बाद श्रद्धालुओं का विश्वास लौटाने की चुनौती होगी। सीमा पार दुश्मनों को धूल चटाने वाले पूर्व जितेंद्र मिश्र को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और पुलिस-प्रशासन के साथ सामंजस्य स्थापित कर वित्तीय पारदर्शिता भी सुनिश्चित करनी होगी ताकि भविष्य में करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर चोट पहुंचाने वाली चढ़ावा चोरी जैसी घटनाएं नहीं दोहराई जाएं।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने स्थानीय साधु-संतों के विरोध के बावजूद सीईओ की नियुक्ति का निर्णय लिया था। चयन समिति ने दो महीने की गहन प्रक्रिया के बाद ऐसे व्यक्ति का चयन किया है, जिन्हें विषम परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव है। देवरिया जिले में भाटपाररानी क्षेत्र के मूल निवासी जितेंद्र मिश्र ने अपने जीवन के लगभग 39 वर्ष देश की रक्षा में खपाए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है धार्मिक स्थल
राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हुआ है और यह धार्मिक स्थल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। हाल ही में चढ़ावा चोरी की घटना ने मंदिर की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाया।
एसआइटी जांच में विभिन्न स्तर पर कमियां उजागर हुईं, जिसमें बैंक और ट्रस्ट के बीच दिखावे के लिए एसओपी बनाई गई थी। भक्तों द्वारा दान की गई राशि का कोई स्पष्ट रिकार्ड नहीं रखा गया। ट्रस्ट में कार्यरत व्यक्तियों की नियुक्तियां भी असमानताएं दर्शाती हैं।
अब नए सीईओ को वायु सेना से मिले प्रशासनिक अनुभव का प्रयोग करते हुए अनुशासन स्थापित करना होगा। उन्हें दानराशि की गणना, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों में विश्वास, सुरक्षा में संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं में आस्था जगाने की आवश्यकता है। राम मंदिर में प्रतिदिन आने वाले एक से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाना होगा। उन्हें उच्च कोटि की सुविधाएं प्रदान करनी होंगी, जिससे वे रामलला का दर्शन आसानी से कर सकें।
दर्शन पास में वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि जरूरतमंद श्रद्धालुओं को निकटता से दर्शन मिल सके। नए सीईओ को रामनगरी के साधु-संतों में भी विश्वास जगाना होगा, जो सीईओ माडल के विरोध में रहे हैं। इसके साथ ही, उन्हें देश के अन्य हिस्सों के संत धर्माचार्यों के लिए भी उच्च कोटि की दर्शन व्यवस्था करने की चुनौती का सामना करना होगा।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने स्थानीय साधु-संतों के विरोध के बावजूद सीईओ की नियुक्ति का निर्णय लिया था। चयन समिति ने दो महीने की गहन प्रक्रिया के बाद ऐसे व्यक्ति का चयन किया है, जिन्हें विषम परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव है। देवरिया जिले में भाटपाररानी क्षेत्र के मूल निवासी जितेंद्र मिश्र ने अपने जीवन के लगभग 39 वर्ष देश की रक्षा में खपाए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है धार्मिक स्थल
राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हुआ है और यह धार्मिक स्थल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। हाल ही में चढ़ावा चोरी की घटना ने मंदिर की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाया।
एसआइटी जांच में विभिन्न स्तर पर कमियां उजागर हुईं, जिसमें बैंक और ट्रस्ट के बीच दिखावे के लिए एसओपी बनाई गई थी। भक्तों द्वारा दान की गई राशि का कोई स्पष्ट रिकार्ड नहीं रखा गया। ट्रस्ट में कार्यरत व्यक्तियों की नियुक्तियां भी असमानताएं दर्शाती हैं।
अब नए सीईओ को वायु सेना से मिले प्रशासनिक अनुभव का प्रयोग करते हुए अनुशासन स्थापित करना होगा। उन्हें दानराशि की गणना, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों में विश्वास, सुरक्षा में संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं में आस्था जगाने की आवश्यकता है। राम मंदिर में प्रतिदिन आने वाले एक से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाना होगा। उन्हें उच्च कोटि की सुविधाएं प्रदान करनी होंगी, जिससे वे रामलला का दर्शन आसानी से कर सकें।
दर्शन पास में वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि जरूरतमंद श्रद्धालुओं को निकटता से दर्शन मिल सके। नए सीईओ को रामनगरी के साधु-संतों में भी विश्वास जगाना होगा, जो सीईओ माडल के विरोध में रहे हैं। इसके साथ ही, उन्हें देश के अन्य हिस्सों के संत धर्माचार्यों के लिए भी उच्च कोटि की दर्शन व्यवस्था करने की चुनौती का सामना करना होगा।
3rd September, 2026
