यूरीड मीडिया- भारत जैसे देश के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का विकास बहुत जरुरी है और इसके लिए ग्राम पंचायतों की सबसे अहम भूमिका होती है। क्योकि आज भी देश की जनसख्या की 65% आबादी गांव में रहती है। उत्तर प्रदेश 10 वर्ष बाद देश में 15वे स्थान से 5वें पर पंहुचा है। यह हमारे लिए अच्छी खबर है लेकिन अभी बहुत सारे सुधार की आवश्यकता है। पंचायती राज मंत्रालय और आईआईपीए(भारतीय लोक प्रशासन संस्थान) ने गुरुवार को पंचायत डिवोल्यूशन इंडेक्स जारी किया। गांव और शहरों के विकास में पंचायत और निकाय प्रतिनिधियों की अधिक से अधिक भागीदारी हो इसके लिए 1994 में सविधान में 73 वां और 74वां संविधान संसोधन किया गया। जिसमें दलितों पिछड़ों महिलाओं की भागीदारी बढ़े इसके लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी जिनमें दलितों 21% पिछड़ों 27% और महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया। इसके अलावा व्यापक अधिकार भी दिए गए। जिससे कि जन प्रतिनिधि कर्मचारियों अधिकारियों के साथ मिलकर कार्य कर सके लेकिन तीन दशक से अधिक समय के बाद भी आरक्षण तो दिया गया लेकिन अधिकार संविधान की मंशा के अनुरूप नहीं दिए गए। लेकिन इस सब के बाद भी पारदर्शिता बढ़ी जो राज्य सरकार पारदर्शी तरीके से जन प्रतिनिधियों का सहयोग लेकर कार्य किया। वहां विकास कार्यों को गति मिली। इनमें दक्षिण भारत भारत अग्रणी रहा है।
14th February, 2025
